शिमला, 26 अगस्त 2026: हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक कला, शिल्प एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण
में कारीगर समुदायों के योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से लोक भवन, शिमला में कारीगरों के
अभिनंदन एवं भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण प्रमाणपत्रों के वितरण हेतु एक कार्यक्रम आयोजित
किया गया। कार्यक्रम के दौरान माननीय राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश ने संबंधित कारीगर समुदायों के
प्रतिनिधियों को जीआई पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किए।
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय, राज्य के विशिष्ट
पारंपरिक उत्पादों एवं शिल्पों के संवर्धन, संरक्षण और औपचारिक मान्यता हेतु निरंतर सहयोग प्रदान कर
रहा है। इन्हीं प्रयासों के अंतर्गत नाबार्ड ने तीन पारंपरिक उत्पादों, अर्थात् हिमाचल रणसिंघा (वाद्य यंत्र),
हिमाचल हस्तनिर्मित गलीचा (कालीन) तथा हिमाचल काष्ठ नक्काशी शिल्प के जीआई पंजीकरण को
सुगम बनाया।
इन उत्पादों का जीआई पंजीकरण हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक ज्ञान, शिल्प कौशल और सांस्कृतिक
विरासत को मान्यता प्रदान करने तथा संरक्षित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। जीआई
मान्यता से इन उत्पादों की विशिष्ट पहचान एवं प्रामाणिकता को सुदृढ़ करने, उनकी दृश्यता एवं बाजार
संभावनाओं को बढ़ाने तथा इनसे जुड़े कारीगरों के लिए आजीविका के बेहतर अवसर सृजित होने की
अपेक्षा है।
इस अवसर पर उपस्थित डॉ. विवेक पठानियाँ, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय ने
कहा कि तीनों हिमाचली उत्पादों का जीआई पंजीकरण राज्य की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और
पारंपरिक कारीगरों के लिए सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम
है। डॉ. पठानियाँ ने कहा कि नाबार्ड मूल्य शृंखला विकास, ब्रांडिंग, बाजार संपर्क, क्षमता निर्माण तथा
जीआई पंजीकरण के उपरांत आवश्यक सहयोगात्मक पहलों के माध्यम से उत्पादक समूहों एवं कारीगर
समुदायों को सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
श्री कुशल दीप, उप महाप्रबंधक तथा श्री हिमांशु बालियान, सहायक प्रबंधक, नाबार्ड हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय
कार्यालय भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में संबंधित कारीगर समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इस आयोजन के माध्यम से
राज्य की समृद्ध शिल्प परंपराओं के संरक्षण में उनके बहुमूल्य योगदान को औपचारिक रूप से मान्यता
प्रदान की गई। साथ ही, हिमाचल प्रदेश के विशिष्ट पारंपरिक उत्पादों और शिल्पों के संरक्षण, संवर्धन एवं
व्यावसायिक विकास के प्रति नाबार्ड की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया गया।









