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वन्यजीव सप्ताह-2026 के सातवें दिन सेमिनार का आयोजन

 

शिमला, 7 अक्तूबर 2026

हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यप्राणी प्रभाग द्वारा 75वें वन्यजीव सप्ताह–2026 के अवसर पर वन मुख्यालय शिमला में सेमिनार-कम-वेबिनार का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से
डॉ संजय सूद,प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन बल प्रमुख) श्रीमान आलोक प्रेम नागर, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन) श्रीमान के. थिरूमल,मुख्य अरण्यपाल एवं अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यजीव),श्रीमान कृष्ण कुमार,निदेशक, (HPFDC),दक्षिण,श्रीमती प्रीति भंडारी, अरण्यपाल (वन्यजीव),शिमला, वन मुख्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी,वर्चुअल माध्यम से विभिन्न वन वृतों के अरण्यपाल,वन मंडल अधिकारी तथा विभिन्न संस्थाओं से आयें हुए प्रतिभागी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव एवं जैव विविधता के संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान, समुदाय की भागीदारी तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रभावी प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।

सेमिनार के दौरान विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी प्रस्तुतियां दी गईं।
सुश्री अक्षता, ने “Research and Conservation” विषय पर प्रस्तुति देते हुए वन्यजीव संरक्षण में अनुसंधान की भूमिका तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के महत्व पर प्रकाश डाला।

इसके बाद सुश्री मलयसरी ने “Vulture Conservation and Role of Community” विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने गिद्धों के संरक्षण तथा इस दिशा में स्थानीय समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से जानकारी साझा की।

डॉ. ललित कुमार शर्मा, वैज्ञानिक-ई, ZSI कोलकाता ने “Securing Wildlife Habitats, Safeguarding livelihoods: Evidence based Human Wildlife Conflict mitigation in Himachal Pradesh” विषय पर प्रस्तुति देते हुए वन्यजीव आवासों के संरक्षण, स्थानीय आजीविका की सुरक्षा तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष के वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित समाधान पर विचार रखे।

डॉ. रंजना नेगी, वैज्ञानिक-ई, ICFRE–HFRI ने “Conservation of Alpine & High-Altitude Grasslands: Safeguarding water security, Wildlife Habitat & Rural livelihood” विषय पर प्रस्तुति दी। उन्होंने उच्च हिमालयी एवं अल्पाइन घासभूमियों के संरक्षण को जल सुरक्षा, वन्यजीव आवास और ग्रामीण आजीविका से जोड़ते हुए इनके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।

वहीं डॉ. वनीत जिष्टू, वैज्ञानिक (सेवानिवृत्त) ने “Plant Diversity of Himachal Pradesh” विषय पर प्रस्तुति देते हुए हिमाचल प्रदेश की समृद्ध पादप विविधता तथा इसके संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के अंत में श्री दिनेश, भारतीय वन सेवा, उप वन अरण्यपाल (मुख्यालय), धर्मशाला द्वारा सारांश एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी,कर्मचारी वन्यजीव विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, तथा अन्य संबंधित प्रतिभागी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के माध्यम से हिमाचल प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव, वनस्पति एवं जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की आजीविका और पर्यावरणीय सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों का संदेश दिया गया।

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