शिमला, 14 सितंबर 2026; भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), शिमला में आज हिंदी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी के सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व, प्रशासनिक कार्य-व्यवहार में इसके प्रयोग तथा ज्ञान-सृजन और समकालीन बौद्धिक विमर्श में हिंदी की भूमिका पर विचार साझा किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. अनुराधा रतूड़ी, अध्येता द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। इसके पश्चात् माननीय शिक्षा, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री, भारत सरकार, श्री प्रल्हाद जोशी जी द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर प्रेषित संदेश का वाचन सभागार में किया गया। संदेश में हिंदी को भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय अस्मिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति बताते हुए दैनिक कार्य-व्यवहार में सरल, सहज और प्रभावी हिंदी के प्रयोग पर बल दिया गया। संदेश में ‘विकसित भारत–2047’ के संकल्प की दिशा में हिंदी सहित भारतीय भाषाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित किया गया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले संस्थान के रूप में भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान द्वारा नवी मुंबई में आयोजित हिंदी दिवस एवं छठे अखिल भारतीय हिंदी सम्मेलन में भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। यह सहभागिता हिंदी के प्रचार-प्रसार, राजभाषा के प्रभावी प्रयोग तथा हिंदी से संबंधित राष्ट्रीय स्तर की गतिविधियों के साथ संस्थान के जुड़ाव को और सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान संस्थान के विभिन्न वर्गों से जुड़े प्रतिभागियों ने हिंदी के विविध पक्षों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। पुस्तकालय परिचर श्री दीपक शर्मा तथा कार्यालय सहायक श्री सुरेन्द्र रमौला ने हिंदी के व्यवहारिक एवं संस्थागत पक्षों पर विचार रखे। अध्येता डॉ. तहसीन मजहर, सह-अध्येता डॉ. कुमार वरुण तथा अध्येता डॉ. सुमेष्ठा और राष्ट्रीय अध्येता प्रोफेसर सच्चिदानंद मोहंती ने हिंदी, ज्ञान, शिक्षा और समकालीन संदर्भों से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर संजय भट्ट, अध्येता, ने हिंदी के व्यापक बौद्धिक और सामाजिक संदर्भों पर प्रकाश डाला। उन्होंने भाषा को केवल संप्रेषण के माध्यम के रूप में देखने के बजाय ज्ञान, चिंतन और विमर्श की सशक्त आधारभूमि के रूप में समझने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर यह विचार भी प्रमुखता से सामने आया कि हिंदी दिवस की सार्थकता केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित न रहकर हिंदी को दैनिक कार्यालयीन कार्य-व्यवहार, शोध, शिक्षा और ज्ञान-विनिमय में सहजता एवं प्रभावशीलता के साथ अपनाने में है। डिजिटल प्रौद्योगिकी और बदलते ज्ञान-परिदृश्य के संदर्भ में हिंदी के प्रयोग की नई संभावनाओं पर भी ध्यान आकृष्ट किया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. मीनू अग्रवाल, आवासी चिकित्सा अधिकारी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अखिलेश पाठक, सचिव, राजभाषा द्वारा किया गया।
हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम संस्थान में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने तथा हिंदी को अध्ययन, अनुसंधान और संस्थागत कार्य-व्यवहार के अधिक प्रभावी माध्यम के रूप में स्थापित करने की दिशा में आयोजित गतिविधियों की कड़ी का हिस्सा रहा।









