डॉ. बिंदल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सरकारी संसाधनों, माइनिंग, ड्रेजिंग, स्टोन क्रशर और ठेकों से जुड़े अनेक मामलों पर गंभीर सवाल उठे हैं। भाजपा लगातार मांग करती आई है कि जहां भी मंत्री, सत्ता से जुड़े व्यक्ति अथवा उनके निकटस्थ लोगों पर आर्थिक हितों या नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आए हैं, वहां सरकार लीपापोती करने के बजाय दस्तावेजों को सार्वजनिक करे और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच करवाए।
उन्होंने कहा कि ब्यास नदी में ड्रेजिंग के नाम पर माइनिंग से जुड़े मामले में भाजपा ने कई गंभीर प्रश्न उठाए हैं। बेस वैल्यू की राशि सरकार के पास जमा हुई या नहीं, आवश्यक बैंक गारंटी की स्थिति क्या है, वन विभाग के माध्यम से माइनिंग करवाने का निर्णय किस आधार पर और किस प्रक्रिया से लिया गया तथा कैबिनेट स्तर पर निर्णय लेने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई—सरकार को इन सभी सवालों का तथ्यात्मक उत्तर प्रदेश की जनता के सामने रखना चाहिए। यदि किसी स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग अथवा वित्तीय अनियमितता के प्रमाण सामने आते हैं तो सक्षम केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा भी मामले की जांच होनी चाहिए।
डॉ. बिंदल ने कहा कि जयसिंहपुर क्षेत्र में निर्माणाधीन स्टोन क्रशर को लेकर भी भाजपा नेताओं ने मंत्री की कथित व्यावसायिक हिस्सेदारी और नियमों के पालन पर सवाल उठाए हैं। सरकार को इन आरोपों पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय संबंधित अनुमति, हिस्सेदारी, पर्यावरण स्वीकृति और अन्य सरकारी रिकॉर्ड सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है तो सरकार को जांच से घबराने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस विपक्ष के सवालों का जवाब देने के बजाय राजनीतिक प्रतिशोध और पुलिस कार्रवाई का सहारा लेने का प्रयास करती है। लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व सरकार से प्रश्न पूछना है और सरकार का दायित्व तथ्यों के साथ उत्तर देना है। भाजपा न तो दबाव में आएगी और न ही प्रदेश की जनता के धन और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े सवाल उठाना बंद करेगी।
डॉ. बिंदल ने कहा, “उत्तराखंड में सवाल युवाओं की भर्ती और भविष्य का है, कर्नाटक में सार्वजनिक धन और विदेशी निवेश से जुड़े आरोपों का है और हिमाचल में प्राकृतिक संसाधनों, माइनिंग, ड्रेजिंग तथा सरकारी निर्णयों की पारदर्शिता का सवाल है। कांग्रेस नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि वह अपने नेताओं पर उठ रहे सवालों पर वही जवाबदेही स्वीकार करेगा या नहीं, जिसकी मांग वह दूसरों से करता है।”
उन्होंने कहा कि भाजपा की स्पष्ट मांग है कि हिमाचल में जिन-जिन मामलों में भ्रष्टाचार, आर्थिक अनियमितता, नियमों की अनदेखी अथवा सत्ता के दुरुपयोग के ठोस तथ्य सामने आते हैं, उनकी समयबद्ध और निष्पक्ष जांच हो। किसी भी दोषी को राजनीतिक संरक्षण नहीं मिलना चाहिए और प्रदेश के संसाधनों की एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने आना चाहिए।









