Shimla 19 September
SJVNL सतलुज जलविद्युत निगम और हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार के बीच तीन विद्युत प्रोजेक्टों को लेकर विवाद चल रहा है, मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने पिछले कल एक प्रैस विज्ञप्ति में धौलासिद्ध विद्युत प्रोजेक्ट्स को सरकार के अधीन लेने की बात की है और कहा है कि सरकार सतलुज जलविद्युत निगम को 800 करोड़ रूपए देकर धौलासिद्ध को अपने अधीन लेगी,सतलुज जलविद्युत निगम के सूत्रों का कहना है कि अभी तक धौलासिद्ध परियोजना में 1100 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं,इस प्रकार, सुक्खू सरकार परियोजना के लिए 800 करोड़ देने की बात करती हो और सतलुज जलविद्युत निगम प्रबंधन परियोजना में 1100 करोड़ खर्च आने की बात करता है,फिर बात कहां बनेगी।
सतलुज जलविद्युत निगम में भारत सरकार का शेयर 55%,हिमाचल सरकार का 26’85 और पब्लिक शेयरहोल्डर्स का 17’5% हिस्सेदारी है, स्वाभाविक है इसमें भारत सरकार, हिमाचल सरकार, तथा पब्लिक तीनों की सहमति के बगैर कोई निर्णय नहीं हो सकता,तो सरकार का 800 करोड़ देकर वापस लेने का मामला कैसे हल हो जायेगा।
हिमाचल सरकार ने एक समय तीनों विद्युत प्रोजेक्ट्स धौलासिद्ध, लूरी और सूनी को हिमाचल सरकार के अधीन लेने की बात कही है,
सतलुज जलविद्युत निगम प्रबंधन का कहना है कि इन तीनों परियोजनाओं में कंपनी का 6500करोड़ खर्च हो चुका है,यदि हिमाचल सरकार इतनी राशि को चुका सकती है तो सतलुज जलविद्युत निगम को कोई आपत्ति नहीं है, केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने भी हिमाचल सरकार के आग्रह के बाद यह कहा है कि यदि सरकार अभी तक की गई खर्च हुई राशि को चुकाने में समर्थ है तो केंद्र सरकार उसके लिए तैयार है,लेकिन शायद इतनी बड़ी राशि चुका पाना एक दिवास्वप्न है और आगामी चुनाव के दृष्टिगत एक शोसा मात्र है।
इस समय धौलासिद्ध विद्युत प्रोजेक्ट्स में प्रति यूनिट का खर्च 11,20पै खर्च आ रहा है, जबकि सरकार अभी तक अपने उपभोक्ताओं को महंगी बिजली ,सैस लगाकर उपभोक्ताओं के ऊपर बोझ डालती आ रही है।
एक ओर सरकार की जेब खाली है,हर महीने 700 करोड़ कर्जा लिया जा रहा है तो,तीन प्रोजेक्ट्स का 6500 करोड़,व अकेले धौलासिद्ध कि 11,00 करोड़ से अधिक खर्च कहां से आएगा,सरकार को इसका जवाब देना होगा,लेकिन सरकार के पास खोखली घोषणा के अलावा और कोई जवाब नहीं होगा।
गणेश दत्त।









