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चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में 5 दिवसीय थिएटर फेस्टिवल ‘दस्तक’ का आयोजन; मानवीय भावनाओं का जश्न मनाने के लिए एक मंच पर आए दिग्गज अभिनेता और थिएटर कलाकार

 

कॉमेडी से लेकर सामाजिक व्यंग्य तक, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के ‘दस्तक थिएटर फेस्टिवल 2026′ में मशहूर कलाकारों और थिएटर कलाकारों के पेश की कई दमदार कहानियाँ

जुही बब्बर सोनी के नाटक ‘एक लम्हा ज़िंदगी’ ने दस्तक थिएटर फेस्टिवल 2026 के पहले दिन दर्शकों को किया भावुक

राकेश बेदी और दानिश इकबाल से लेकर जतिन सरना, परितोष त्रिपाठी और जुही बब्बर सोनी तक, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के पांच दिवसीय थिएटर फेस्टिवल में शामिल हुए दिग्गज अभिनेता और थिएटर कलाकार

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का वार्षिक थिएटर फेस्टिवल ‘दस्तक ‘ कैंपस में शुरू हो गया है। कहानियों, भावनाओं और दमदार प्रस्तुतियों के इस पांच दिवसीय शानदार उत्सव में प्रसिद्ध अभिनेता, थिएटर कलाकार, परफॉर्मिंग आर्ट्स प्रोफेशनल तथा मनोरंजन जगत के दिग्गज और छात्र एक साथ आए हैं। थिएटर फेस्टिवल में प्यार और रिश्तों से लेकर हास्य, कहानी कहने की कला और सामाजिक बुराइयों जैसे कई दिलचस्प विषयों पर बेहतरीन नाटकों का मंचन किया जा रहा है। इससे दर्शकों को मनोरंजन के साथ-साथ समाज और जीवन के विभिन्न पहलुओं को एक नए नजरिए से देखने का मौका मिल रहा है।

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के ‘डिपार्टमेंट ऑफ आर्ट एंड कल्चरल अफेयर्स’ द्वारा आयोजित ‘दस्तक थिएटर फेस्टिवल 2026’ का उद्घाटन कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में हुआ। इनमें जीटीसी नेटवर्क के फाउंडर, मैनेजिंग डायरेक्टर एवं चेयरमैन डॉ. रबिंदर नारायण, अभिनेत्री जूही बब्बर सोनी, पंजाबी फिल्म अभिनेता मलकीत रौनी, जीटीसी नेटवर्क के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ प्रोग्रामिंग निखिल मिश्रा और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की डायरेक्टर जन्नत कौर संधू सहित कई अन्य हस्तियां शामिल थीं।

थिएटर फेस्टिवल में शामिल होने वाले फिल्म, टेलीविजन और मनोरंजन जगत की जानी-मानी हस्तियां में ‘धुरंधर’ (फेम) कलाकार राकेश बेदी और दानिश इकबाल, ‘सेक्रेड गेम्स’ के अभिनेता जतिन सरना, रियलिटी शो ‘सुपर डांसर’ में “TRP मामा” के नाम से मशहूर अभिनेता परितोष त्रिपाठी, थिएटर और टेलीविजन अभिनेत्री सुगंधा श्रीवास्तव, अनुभवी अभिनेत्री और निर्देशक अनामिका सागर, ‘पीके ‘ और ‘लव आज कल’ जैसी फिल्मों के अभिनेता और निर्देशक राजिंदर शर्मा ‘नानू’, थिएटर निर्देशक, अभिनेता और संगीतकार अजीत चौधरी, ‘चौपाल’ के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप बंसल, गायक अमन जाजी, अभिनेता शिशिर शर्मा और फिल्म निर्माता व गीतकार शामिल हैं।

इस पांच दिवसीय थिएटर फेस्टिवल में मोनो एक्टिंग, मिमिक्री, नुक्कड़ नाटक, शॉर्ट फ़िल्में, स्टैंड-अप कॉमेडी और फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता के अलावा, ‘दस्तक थिएटर फ़ेस्टिवल 2026’ में छह नाटक – ‘एक लम्हा ज़िंदगी: अ लव स्टोरी 1938–1979’, ‘आँख मिचौली’, ‘मसाज’, ‘बुनकर: अ थिएट्रिकल प्रेजेंटेशन ऑफ़ स्टोरीज़’, ‘पति गए रे काठियावाड़’  और ‘काजू कतली’ शामिल हैं।

अपने संबोधन में मुख्य अतिथि और जीटीसी नेटवर्क के फाउंडर, मैनेजिंग डायरेक्टर व चेयरमैन रवींद्र नारायण ने कहा, “थिएटर केवल अभिनय करना नहीं, बल्कि अनुशासन और जीवन जीने की कला सिखाता है। यह व्यक्तित्व का विकास करता है और संवाद करने, अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने, लोगों से जुड़ने और सोचने की क्षमता को बेहतर बनाता है। यह हमें बेहतर नागरिक बनाता है। सभी छात्रों को किसी न किसी नाटक में भाग लेना चाहिए और देखना चाहिए कि यह किस तरह उनके व्यक्तित्व को बदल सकता है।

अपने स्वागत भाषण में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की डायरेक्टर जन्नत कौर संधू ने कहा, “चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में हम चाहते हैं कि हमारे  छात्र न केवल कुशल और सफल हों, बल्कि जिज्ञासु ,संवेदनशील और जो अलग सोच रखने वाले हों।’दस्तक’ थिएटर फ़ेस्टिवल कलात्मक अभिव्यक्ति, मानवीय अनुभवों की गहराई और विविधता, तथा कहानी कहने की कला की शक्ति है जो न केवल दिलों को छूती है, बल्कि व्यक्ति को बौद्धिक और भावनात्मक स्तर पर बेहतर बनाती है।”

फेस्टिवल के पहले दिन बेहद भावनात्मक नाटक ‘एक लम्हा ज़िंदगी – ए लव स्टोरी 1938–1979’ का मंचन किया गया, जो जूही बब्बर सोनी के दादा-दादी की असल ज़िंदगी की प्रेम कहानी से प्रेरित है। मकरंद देशपांडे और जूही बब्बर सोनी द्वारा निर्देशित यह नाटक दर्शकों को रिश्तों की जटिलताओं, मानवीय भावनाओं की गहराई और समय के साथ जीवन के अनुभवों के बदलने के बारे में है। जूही बब्बर सोनी, नादिरा ज़हीर बब्बर और नूर ज़हीर द्वारा लिखित यह नाटक समय, दूरी और उतार-चढ़ाव के बावजूद प्यार तथा पीढ़ियों तक अपनी मज़बूती दर्शाता है।

अभिनेत्री जूही बब्बर सोनी ने कहा, “हर उभरते कलाकार को थिएटर ज़रूर करना चाहिए। थिएटर एक मज़बूत नींव बनाता है। एक कलाकार के लिए अपने काम का लगातार अभ्यास करते रहना बहुत ज़रूरी है। अभ्यास का मतलब सिर्फ अभिनय करना ही नहीं, बल्कि बेहतरीन नाटकों को देखना, समझना और कुशल कलाकारों को बारीकी से देखना शामिल है। हालाँकि इसमें रूप-रंग और शारीरिक बनावट मायने रखती है, लेकिन बौद्धिक और कलात्मक विकास पर ध्यान देना भी ज़रूरी है ताकि काम को और बेहतर स्तर तक ले जाया जा सके।”

इससे पहले, थिएटर फेस्टिवल का आरम्भ ‘काजू कतली’ नाटक से हुआ। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी छात्रों द्वारा मंचित नाटक ‘काजू कतली’ को कईक्षेत्रीय और राष्ट्रीयथिएटर फेस्टिवलों में सराहना मिल चुकी है। नाटक की कहानी दो बहनों काजू और कतली के दुखद जीवन पर आधारित है। काजू सुन नहीं सकती और कतली बोल नहीं सकती। उनके पिता पैसों के लालच में उन्हें एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी को बेच देते हैं, लेकिन कतली वहाँ से भागने में कामयाब हो जाती है। वह अपने पिता और उस पुलिस अधिकारी को उनके किए की सज़ा दिलाती हुए काजू को भी बचा लेती है।

फेस्टिवल के दूसरे दिन ‘आँख मिचौली’ का मंचन किया जा रहा है। एक लोकप्रिय हिंदी कॉमेडी-ड्रामा नाटक विकास बहारी द्वारा निर्देशित और सीपी देशपांडे द्वारा लिखित है।  नाटक के कलाकारों में जतिन सरना, परितोष त्रिपाठी, सुगंधा श्रीवास्तव और रश्मित देसाई शामिल हैं। ‘आंख मिचौली’ की कहानी एक ऐसे आम दिखने वाले परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें कई राज़, गलतफहमियां और दबी हुई भावनाएं छिपी हैं।

तीसरे दिन राकेश बेदी का सोलो मोनोलॉग ‘मसाज’ पेश किया जाएगा।  इस ‘वन-मैन शो’ में जाने-माने अभिनेता राकेश बेदी अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता से 24 अलग-अलग किरदारों को प्रस्तुत करेंगे। हरबंश सिंह द्वारा निर्देशित यह नाटक ‘हैप्पी कुमार’ की कहानी है, जो अभिनेता बनने का सपना लेकर मुंबई आता है, लेकिन अंततः एक पर्सनल मसाजर (मालिश करने वाले) के रूप में काम करने लगता है। उसके नज़रिए से, दर्शक राजनेताओं, उच्च समाज के तौर-तरीकों, वकीलों और फिल्म निर्माताओं पर किए गए तीखे और मज़ेदार कटाक्ष का अनुभव करते हैं।

फेस्टिवल के चौथे दिन ‘बुनकर’ नाटक दिखाया जाएगा।  इसे दानिश इकबाल और अनामिका सागर ने डायरेक्ट और परफॉर्म भी किया है। इस नाटक में दो कहानियाँ हैं पहली हीरो: एक लव स्टोरी, जिसे रवि बुले ने लिखा है,जो एक प्यारे रोमांटिक सपने देखने वाले की कहानी है, जिसकी दुनिया अचानक एक चौंकाने वाले खुलासे से पूरी तरह बिखर जाती है। दूसरी कुणाल सिंह द्वारा लिखित कहानी साइकिल है जो बचपन, गहरी दोस्ती, प्यार और ज़िंदगी के खट्टे-मीठे पड़ावों को पुरानी यादों को दर्शाती है।

फेस्टिवल का समापन ‘पति गए रे काठियावाड़’ के साथ होगा। सुधीर बी कुलकर्णी द्वारा लिखित और अजीत चौधरी द्वारा निर्देशित है। ‘पति गए रे काठियावाड़’ एक सटायरिकल रोमांटिक कॉमेडी है जो एक पति और पत्नी के इर्द-गिर्द घूमती है। एक घरेलू कहानी पर आधारित, जहाँ पति काठियावाड़ इलाके के लिए निकल जाता है, इस स्क्रिप्ट में समाज की उम्मीदों और शादीशुदा रिश्तों की बुराई करने के लिए ह्यूमर, कल्चरल बातों और तेज़ बुद्धि का इस्तेमाल किया गया है।

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