अंधाधुंध कटान और ब्लास्टिंग से बढ़ रहे भूस्खलन पर जताई चिंता, केंद्र से हिमालयी राज्यों के लिए वैज्ञानिक एवं पर्यावरण-अनुकूल सड़क निर्माण नीति बनाने का आग्रह
शिमला, 7 अगस्त। हिमाचल प्रदेश से भाजपा के लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने लोकसभा में नियम-377 के तहत हिमाचल प्रदेश में सड़क निर्माण के दौरान हो रहे अंधाधुंध पर्वत कटान, बढ़ते भूस्खलन और पर्यावरणीय क्षति का गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से हिमालयी राज्यों के लिए वैज्ञानिक, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल सड़क निर्माण नीति तैयार करने की मांग की।
डॉ. राजीव भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सहित समूचे हिमालयी क्षेत्र में फोरलेन और अन्य सड़क परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर पहाड़ों की कटाई और ब्लास्टिंग की जा रही है। इसका परिणाम यह है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं, सड़कें बार-बार बंद हो रही हैं, लोगों की जान-माल को खतरा पैदा हो रहा है तथा करोड़ों रुपये मरम्मत कार्यों पर खर्च करने पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन विकास की कीमत प्रकृति को नष्ट करके नहीं चुकाई जा सकती।
उन्होंने संसद में कहा कि हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि, बागवानी और पर्यटन है। यदि पहाड़ असुरक्षित होंगे तो प्रदेश की पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण में ऐसी तकनीकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिनसे पहाड़ों की अनावश्यक कटाई रोकी जा सके और ढलानों को स्थायी रूप से सुरक्षित बनाया जा सके।
डॉ. भारद्वाज ने बताया कि हाल ही में परवाणू फोरलेन परियोजना में Turf Reinforcement Mats (TRM) जैसी आधुनिक तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है, जिससे भूस्खलन की संभावना कम करने और ढलानों को स्थिर रखने में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि Hydroseeding, Rock Bolting, Mesh Reinforcement, Geocells, Soil Nailing तथा अन्य आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों को भी हिमालयी क्षेत्रों की सड़क परियोजनाओं में व्यापक रूप से अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि हिमालयी राज्यों के लिए अलग Mountain Road Construction Policy बनाई जाए, सभी सड़क परियोजनाओं में भू-वैज्ञानिक अध्ययन और Slope Stability Audit को अनिवार्य किया जाए तथा पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों को सड़क निर्माण का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए। उन्होंने कहा कि इससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण होगा, भूस्खलन की घटनाओं में कमी आएगी, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी तथा भविष्य में सड़कों के रखरखाव पर होने वाला भारी खर्च भी कम होगा।
डॉ. राजीव भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक धरोहर केवल प्रदेश की नहीं बल्कि पूरे देश की अमूल्य संपत्ति है। इसलिए विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए ऐसी तकनीकों को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए हिमालय सुरक्षित और संरक्षित रह सके।








