शिमला/मुंबई 02 अगस्त 2026
हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (HPNLU), शिमला और महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (MNLU), मुंबई ने कानूनी शिक्षा के इन दो प्रमुख संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग, शोध सहयोग, फैकल्टी की भागीदारी और छात्रों के विकास की पहलों को मजबूत करने के लिए 01 अगस्त 2026 को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
यह MoU, HPNLU, शिमला की माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीति सक्सेना और MNLU, मुंबई के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिलीप उके के बीच किया गया है। इसका उद्देश्य संस्थागत सहयोग के माध्यम से कानूनी शिक्षा, शोध और क्षमता निर्माण में उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है।
हिमाचल प्रदेश नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी एक्ट, 2016 के तहत स्थापित HPNLU, शिमला, कानूनी शिक्षा में उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में उभरा है। यह हिमालय के अनूठे परिवेश में शैक्षणिक कठोरता को अंतर-विषयक (interdisciplinary) और व्यावहारिक शिक्षा के साथ जोड़ता है। महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी एक्ट, 2014 के तहत स्थापित महाराष्ट्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, मुंबई, भारत की प्रमुख नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ में से एक है।
इस MoU में सहयोग का एक व्यापक ढांचा तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक और संस्थागत सहयोग को बढ़ावा देना है। यह साझेदारी छात्रों, शोधकर्ताओं और फैकल्टी सदस्यों के आदान-प्रदान को आसान बनाएगी, जिससे बेहतर शैक्षणिक बातचीत और अनुभव के अवसर मिलेंगे। दोनों संस्थान आपसी सहमति की शर्तों पर सेमिनार, कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप, ट्रेनिंग प्रोग्राम और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के आयोजन में सहयोग करेंगे।
इस MoU में संयुक्त शिक्षण, संयुक्त शोध परियोजनाएं, विद्वतापूर्ण प्रकाशन, फैकल्टी और शोधकर्ताओं का आदान-प्रदान और डॉक्टरेट स्तर पर शैक्षणिक जुड़ाव की भी व्यवस्था है। यह दोनों संस्थानों के Ph.D. स्कॉलर्स के लिए शैक्षणिक और लाइब्रेरी संसाधनों तक पहुंच को आसान बनाता है। साथ ही, यह अंतर-विषयक शोध पहलों, क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों और राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय फंडिंग एजेंसियों द्वारा समर्थित संयुक्त परियोजनाओं के विकास को प्रोत्साहित करता है, जिससे दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक उत्कृष्टता और बौद्धिक आदान-प्रदान मजबूत होता है।
यह MoU, HPNLU के अपने राष्ट्रीय शैक्षणिक नेटवर्क का विस्तार करने और रणनीतिक संस्थागत साझेदारियों के माध्यम से अपने छात्रों और फैकल्टी को व्यापक अवसर प्रदान करने के निरंतर प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।








