आपदा के दौरान प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता – दीपक राठौर

उपाध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की मानसून तैयारियों की समीक्षा की

उपाध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण दीपक राठौर ने कहा कि प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आपदा के दौरान प्रत्येक व्यक्ति के जीवन की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में समय पर प्रतिक्रिया, प्रभावी समन्वय तथा पूर्व तैयारियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
दीपक राठौर आज यहां बचत भवन में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), शिमला द्वारा मानसून सीजन-2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में जिला के सभी उपमंडलाधिकारियों (एसडीएम) तथा तहसीलदारों ने ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया।
उन्होंने कहा कि जिला शिमला में वर्षा एवं हिमपात के दौरान प्राकृतिक आपदाओं की आशंका बनी रहती है। इसके अतिरिक्त फोरलेन तथा टनल निर्माण सहित अन्य विकासात्मक कार्यों के कारण भी आपदा की संभावनाएं बनी रहती हैं। ऐसे में सभी विभागों को सदैव सतर्क एवं संवेदनशील रहकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन की आपदा प्रबंधन तैयारियों की सराहना करते हुए कहा कि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा की गई तैयारियां संतोषजनक हैं।
उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि प्रत्येक पंचायत में कम-से-कम पांच व्यक्तियों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, ताकि आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके तथा जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वह मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से भी चर्चा करेंगे, ताकि इस व्यवस्था को प्रदेशभर की पंचायतों में लागू किया जा सके।
उपाध्यक्ष ने बताया कि हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एक मोबाइल ऐप विकसित कर रहा है। इस ऐप के माध्यम से आपदा की स्थिति में घटना स्थल की सटीक जानकारी कुछ ही सेकंड में राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र तथा जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र तक उपलब्ध हो सकेगी, जिससे त्वरित राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित किए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि ऐप का विकास कार्य अंतिम चरण में है तथा इसे शीघ्र ही लॉन्च किया जाएगा।
बैठक के दौरान समेज त्रासदी पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें भीषण आपदा के दौरान जिला प्रशासन द्वारा किए गए राहत एवं बचाव कार्यों को दर्शाया गया। डॉक्यूमेंट्री देखने के उपरांत दीपक राठौर ने जिला प्रशासन के मानवीय एवं सराहनीय प्रयासों की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

शिमला को अधिक सुरक्षित एवं आपदा सहनशील बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा प्रशासन – उपायुक्त 
इस अवसर पर उपायुक्त एवं अध्यक्ष, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अनुपम कश्यप ने उपाध्यक्ष का स्वागत करते हुए जिले में आपदा प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य “आपदा सहनशील (Disaster Resilient) शिमला” का निर्माण करना है। इसके लिए आपदा जोखिम न्यूनीकरण, त्वरित राहत एवं बचाव तथा आवश्यक सेवाओं की शीघ्र एवं निर्बाध बहाली पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि किसी भी आपदा अथवा दुर्घटना की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति अथवा परिवार को राहत राशि समयबद्ध ढंग से उपलब्ध करवाई जाए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन जनसहभागिता एवं विभिन्न विभागों के समन्वय से शिमला को अधिक सुरक्षित एवं आपदा सहनशील बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (प्रोटोकॉल) ज्ञान सागर नेगी ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से मानसून सीजन-2026 के लिए जिला प्रशासन द्वारा की गई तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जिला शिमला भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में स्थित है, जहां जलवायु परिवर्तन, अनियोजित शहरीकरण, भूस्खलन, फ्लैश फ्लड तथा अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाओं का जोखिम लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2022 से 2025 के दौरान जिले में सामान्य से औसतन 52.8 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि वर्ष 2025 में सामान्य से 94 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई, जो सर्वाधिक रही।

बैठक में बताया गया कि जिला प्रशासन ने 219 पंचायतों को पंचायत इमरजेंसी रिस्पांस योजना के अंतर्गत शामिल किया है। जिले में 200 सुरक्षित आश्रय स्थल चिन्हित किए गए हैं। अब तक 550 युवा ‘आपदा मित्र’ स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है तथा 80 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
मानसून के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों के लिए शिमला पुलिस तथा होमगार्ड की द्वितीय एवं तृतीय बटालियन को 48 प्रकार के आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (डीईओसी) को अत्याधुनिक संचार सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में जनरेटर, सैटेलाइट संचार (आईसैट), वीएचएफ नेटवर्क, लैंडलाइन, मोबाइल तथा इंटरनेट सेवाएं चौबीसों घंटे सक्रिय रखी गई हैं।
इसके अतिरिक्त भारतीय सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), होमगार्ड तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी आपदा प्रबंधन व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
बैठक में यह भी बताया गया कि 1 जुलाई से 24 जुलाई, 2026 के दौरान जिले में प्रभावित अधिकांश सड़कों, विद्युत आपूर्ति तथा पेयजल योजनाओं की शीघ्र बहाली सुनिश्चित की गई है। इस अवधि में 99 संपर्क सड़कें प्रभावित हुईं, जिनमें से 86 को बहाल किया जा चुका है। इसी प्रकार 136 विद्युत ट्रांसफार्मरों में से 126 तथा 62 पेयजल योजनाओं में से 42 को पुनः सुचारू कर दिया गया है, जबकि शेष स्थानों पर बहाली का कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
इसी अवधि के दौरान जिले में प्राकृतिक आपदाओं के कारण 16 लोगों की मृत्यु हुई तथा विभिन्न स्थानों पर मकानों, गोशालाओं एवं अन्य परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचा। प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 52.80 लाख रुपये की क्षति दर्ज की गई है। प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने तथा पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है।

बैठक में हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से सुनील एवं विनोद, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (कानून एवं व्यवस्था) पंकज शर्मा, उपमंडलाधिकारी (ना.) शिमला (ग्रामीण) मंजीत शर्मा, उपमंडलाधिकारी (ना.) शिमला (शहरी) सनी शर्मा सहित एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड, पुलिस, स्वास्थ्य तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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Author: Public Updates 24

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