शिमला।
हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के सदस्य अक्षय सिंह नैंटा ने कहा कि प्रदेश में कृषि एवं बागवानी क्षेत्र हिमाचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों-बागवानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि विपणन व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं आधुनिक बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा पिछले वर्षों में कृषि विपणन के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 10 एपीएमसी मंडियों और 61 उप-मंडियों के माध्यम से किसानों को बेहतर विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। 26 मंडियों को ई-नाम (e-NAM) पोर्टल से जोड़कर खरीद-बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाई गई है। वहीं, सोलर कोल्ड स्टोरेज जैसी आधुनिक पहल और हिमाचल की चेरी एवं प्लम का ओमान जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात राज्य की कृषि एवं बागवानी नीतियों की बड़ी उपलब्धियां हैं।
अक्षय सिंह नैंटा ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों और बागवानों को बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। अब आवश्यकता इन पहलों को और व्यापक बनाकर हर किसान तक उनका लाभ पहुंचाने की है।
उन्होंने कहा कि अभी भी कई क्षेत्रों में मंडियों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, दूर-दराज़ गांवों में कलेक्शन सेंटर स्थापित करने, किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने तथा कोल्ड चेन नेटवर्क का विस्तार करने की जरूरत है। इन विषयों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
नैंटा ने कहा कि वह प्रदेश के विभिन्न कृषि बाजारों, उप-मंडियों और उत्पादक क्षेत्रों का नियमित दौरा करेंगे तथा किसानों और बागवानों से सीधे संवाद स्थापित करेंगे। उनके सुझावों और समस्याओं को गंभीरता से सुनकर कृषि विपणन बोर्ड और प्रदेश सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाएगा, ताकि समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि सोलर कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाओं का विस्तार अधिक से अधिक जिलों तक हो, ई-नाम व्यवस्था को और सशक्त बनाया जाए तथा चेरी और प्लम के साथ-साथ हिमाचली सेब एवं अन्य बागवानी उत्पादों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए अवसर विकसित किए जाएं।
अक्षय सिंह नैंटा ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल बोर्ड की बैठकों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर किसानों और बागवानों के बीच रहकर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझना और उनके हितों की प्रभावी पैरवी करना है। उन्होंने कहा कि कृषि विपणन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, आधुनिक और किसान-केंद्रित बनाना ही उनकी प्राथमिकता होगी, ताकि प्रदेश का प्रत्येक किसान और बागवान विकास की इस प्रक्रिया का भागीदार बन सके।







